तेरे शहर की हवाओं से भी मुझे बैर हैं,
ये मुझे ही नहीं फिज़ाओं को भी रास्ता भटकाती हैं।
मैं पूछता हूं इनके दिल का पता ,
ये रास्ता मुझे महखाने का दिखलाती हैं।।
कैसे
बयां कर दूं अल्फ़ाज़ नहीं हैं
दर्द को मेरे एहसास नहीं है
लोग पूछते हैं क्या दर्द हैं,
मुझे दर्द हैं किंवो मेरे पास नहीं हैं।।
Anot sing
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